एक बार है मिलने का इरादा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कुछ और ना चाहूँ मैं इससे ज्यादा

बस एक बार है मिलने का इरादा

सुन ले पुकार करले बुलाने का वादा

बस एक बार है मिलने का इरादा

कुछ और ना चाहूँ मैं इससे ज्यादा

मुरादें दिल की सारी पूरी कर देता है

खाली हो झोली तो तू भर देता है

जितना चाहा दिया उससे भी ज्यादा

सुन ले पुकार करले बुलाने का वादा

बस एक बार है मिलने का इरादा

कुछ और ना चाहूँ मैं इससे ज्यादा

विष को भी वश में तू कर लेता है

दुख दर्द सबके भोले तू हर लेता है

देवों में महादेव है रहता सबसे सादा

सुन ले पुकार करले बुलाने का वादा

बस एक बार है मिलने का इरादा

कुछ और ना चाहूँ मैं इससे ज्यादा

पतवार जिसकी शम्भू तू धर लेता है

भंवर भले हों गहरे वो तर लेता है

नाग ग्रीवा सोहे तेरे शीश शशी आधा

सुन ले पुकार करले बुलाने का वादा

बस एक बार है मिलने का इरादा

कुछ और ना चाहे राजीव इससे ज्यादा

©राजीव त्यागी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।