बिन भजन के जगत में

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

बिन भजन के जगत में तू प्राणी,

मोक्ष पाने के काबिल नहीं है,

क्या यही मुख तू लेकर के जाए,

मुँह दिखने के काबिल नहीं है,

जो जो वादा प्रभु से किया था,

भूल कर भी ना नाम लिया था,

भूल बैठा है माया में प्रभु को,

जो भुलाने के काबिल नहीं है,

बिन भजन के जगत में तू प्राणी,

मोक्ष पाने के काबिल नहीं है,

तूने की ना कभी नेक कमाई,

तेरी होगी ना जग में भलाई,

फस गई है भवर बिच नैया,

पार लगाने के काबिल नहीं है,

बिन भजन के जगत में तू प्राणी,

मोक्ष पाने के काबिल नहीं है,

क्यों तू व्यर्था ही पाप कमाए,

अंत में कोई काम ना आए,

कैसा सुन्दर ये नर तन मिला है,

यूँ गवाने के काबिल नहीं है,

बिन भजन के जगत मे तू प्राणी,

मोक्ष पाने के काबिल नहीं है,

तेरी सॉंसों के अनमोल मोती,

गिर ना जाए ये यूँही जमीं पर,

बिन गुरु के निगुरा कहावे,

पास बिठाने के काबिल नहीं है,

बिन भजन के जगत मे तू प्राणी,

मोक्ष पाने के काबिल नहीं है,

बिन भजन के जगत में तू प्राणी,

मोक्ष पाने के काबिल नहीं है,

क्या यही मुख तू लेकर के जाए,

मुँह दिखने के काबिल नहीं है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।