है आपका बड़ा अहसान मेरी माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

है मुझ पे आपका बड़ा अहसान मेरी माता

मुझे दिया चरणों का अपने ध्यान मेरी माता

फिरता था मैं माराथा दुनिया ने ठुकराया

आया शरण आपकी माँ आपने अपनाया

कोई नहीं यहाँ संग जो आप जैसा निभाता

सारी नाते झूठे एक सच्चा आप से नाता

मुझे दिया चरणों का अपने ध्यान मेरी माता

है मुझ पे आपका बड़ा अहसान मेरी माता...

था अभागा भाग्य मारा भाग्य आपने जगाया

भटके हुए राजीव को माँ सच्चा मार्ग सुझाया

आप ना थामती पतवार तो डूब भंवर में जाता

ना खेती नैया मैया आप तो कैसे पार उतर पाता

मुझे दिया चरणों का अपने ध्यान मेरी माता

है मुझ पे आपका बड़ा अहसान मेरी माता..

भरी आपने झोली उसकी जो भी दर पे आपके आया

आया जो बन याचक उसे कभी खाली नहीं लौटाया

जग सारा माँ बन सवाली महिमा आपकी गाता

जो भी आता दर पे आपके कभी खाली हाथ ना जाता

मुझे दिया चरणों का अपने ध्यान मेरी माता

है मुझ पे आपका बड़ा अहसान मेरी माता

©राजीव त्यागी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।