देववासिनी का मुझको द्वार मिला

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

ओ मैय्या देववासिनी का मुझको द्वार मिला

मुझको मां मिल गई , हो हो हो

मुझको मां मिल गई , मां का प्यार मिला।

तर्ज – ओ रब्बा कोई तो बताए प्यार होता है क्या।

अपने पराए नहीं उसकी नजर में

मां बनके रहती है वही मेरे घर में

ओ मैय्या.... ओ मैय्या सुख मांगा थोड़ा बेशुमार मिला

मुझको मां मिल गई , मां का प्यार मिला।

देवास पर है तेरे आंचल की छैयां

हे तुलजा मैया चामुंडा मैया

ओ मैय्या.... ओ मैय्या दुर्गा का तुझमें अवतार मिला

मुझको मां मिल गई , मां का प्यार मिला।

जब भी मिला मां से यही मैंने पाया

मुझे खुशियों से मेरी मां ने मिलाया

ओ मैय्या.... ओ मैय्या मुझे मेरा पूरा संसार मिला

मुझको मां मिल गई , मां का प्यार मिला।

उसे क्या हराएगा तूफान भारी

हो जिसपे मैया किरपा तुम्हारी

ओ मैय्या..... ओ मैय्या सहारा कपिल को हर बार मिला

मुझको मां मिल गई , मां का प्यार मिला।

गायक – कपिल वैष्णव

लेखक – जयंत सांखला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।