गफलत में सोने वाले

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

गफलत में सोने वाले यु खुद से बेखबर है,

क्या ये तुझे खबर है मंजिल तेरी किधर है,

किस काम को ए मनवा दुनिया में है तू आया,

दीहरा जनम को तूने एसे ही क्यों गवाया,

फिर ये जनम दोबारा मिलता नही बर्षर है,

गफलत में सोने .......

खुद को खुदा से बन्दे कैसे छुपाये गा तू,

इस्वर कहा नही है किस को रिजाये गा तू,

तेरे हर एक कर्म पे भगवान की नजर है,

क्या ये तुझे खबर है .......

कर काम कुछ तू ऐसा हो अमर तेरा फषानाम,

सत्कार से हमेशा करे ये जमाना,

उल्त्फत से जो भी गुजरे,

अच्छा बही सफ़र है,

क्या ये तुझे खबर है .....

तू है जाहा मुसाफिर ये देश है बेगाना,

आया तू कहा से तुझको कहा है जाना,

हे ये जगत सराए तेरा नही ये घर है,

क्या ये तुझे खबर है .....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।