देखूँ तुझे तो आये करार , ना देखूँ तो रहू बेक़रार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - आने से जिसके आये बहार

देखूँ तुझे तो आये करार , ना देखूँ तो रहू बेक़रार ,

कैसा ये रिश्ता हैं मेरे सांवरे, कैसा ये रिश्ता हैं मेरे सांवरे,

हर घडी लबो पे ,नाम तेरा ही रहता हैं मेरे ,

पल पल ये अँखिया , देखती हैं सपने ये तेरे ,

सपनो में आकर के -2 , क्यों चले जाते हो मेरे सांवरे ,

बोलो क्यों चले जाते हो मेरे सांवरे

कैसा ये रिश्ता हैं मेरे सांवरे - 2

बन संवर के बैठा , वृन्दावन की तू कुञ्ज गलिन में ,

हर कदम की डाली , रहता है तू हर एक कली में ,

मेरे भी दिल में रहो - 2 , दूर क्यों जाते हो मेरे सांवरे,

बोलो दूर क्यों जाते हो मेरे सांवरे

कैसा ये रिश्ता हैं मेरे सांवरे - 2

मांगू क्या मैं तुझसे , तूने सब कुछ तो मुझको दिया हैं,

कोई भी ना देगा , प्यार जितना तूने दिया हैं ,

तेरे सिवा कोई नहीं - 2 ,अब मुझको प्यारा हैं मेरे सांवरे ,

तू ही मुझे प्यारा हैं मेरे सांवरे ,

तेरा ही सहारा हैं , मेरे सांवरे ,

बस तेरा ही सहारा हैं , मेरे सांवरे

Lyrics - Jay Prakash Verma , Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।