जितनी सुन्दर राधा , उतने ही मोहन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - देना हो तो दीजिये , जनम जनम का साथ

जितनी सुन्दर राधा , उतने ही मोहन ,

इन दोनों के चरणों में, मैं करता हूँ वंदन ,

जितनी भी तारीफ करू मैं, उतनी पड़ेगी कम,

गोरी गोरी राधिका और सांवले मोहन ,

मैं तो बलिहारी जाऊ - २ वार तू तन-मन-धन ,

जितनी सुन्दर राधा , उतने ही मोहन ,

राधे राधे बोलो चाहे , बोलो तुम मोहन ,

एक ही तो रूप हैं , राधा और मोहन ,

देख के इनकी जोड़ी - २ मेरा खो गया हैं मन ,

जितनी सुन्दर राधा , उतने ही मोहन ,

छोटी सी हैं विनती मेरी , ओ राधा मोहन ,

मुझ को भी बना लो तुम , मीरा सी जोगन ,

तेरी जोगन बनकर मैं भी - २ , तेरे गाऊँगी भजन ,

जितनी सुन्दर राधा , उतने ही मोहन ,

Lyrics - Jay Prakash Verma , Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।