भज मन नारायण नारायण नारायण

मोहम्मद रफ़ी
श्री कृष्ण भजन विष्णु भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भाद्रिनाथ जय जय भाद्रिनाथ,

भक्ति भजन में चित रमे तो समय की किस को ध्यान,

दिन कट जाएँ पलों के सामान ।

भज मन नारायण नारायण नारायण, भाद्रिनारायण नारायण नारायण ।

जिस ने दिया यह जीवन, उस प्रभु का करले सुमिरन,

तेरी अधूरी आशा इसी द्वारे पे होगी पूरण ।

भाद्रिनाथ के चरणों में अर्पण कर दे मन और प्राण ॥

बन कर राम पधारे, कभी बन गए कृष्ण मुरारी,

जन हित नारायण ने सदा अलग अलग छबी धारी ।

जब जब भीड़ पड़ी भगतों पर, प्रगटे दया निधान ॥

तुलसी सूर कबीर और दर्श दीवानी मीरा,

भक्ति भजन में खो के वो तो पा गए मुक्ति का हीरा ।

नाम प्रभु का सार जगत में, कह गए संत महान ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।