मेरो मन लग्यो बरसानें में,जहां विराजे राधा रानी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरो मन लग्यो बरसानें में,जहां विराजे राधा रानी

मन हटयो है दुनिया दारी से,जहां मिले खारा पानी

मेरो मन....

1.मुझे दुनिया से नहीं कोई काम,मुझे दुनिया से नहीं कोई काम

मैं तो रटूं श्री राधा राधा नाम,मैं तो रटूं श्री राधा राधा नाम

दर्शंन करूं सुबह शाम,दर्शंन करूं सुबह शाम

जहां बिराजे राधा रानी,जहां बिराजे राधा रानी

मेरे मन में विराजे श्याम दीवानी,मेरे मन में विराजे श्याम दिवानी

जहां विराजे राधा रानीं,जहां बिराजे राधा रानी

मेरो मन....

2.मेरे मन में ना लागे कोई रंग,मेरे मन में ना लागे कोई रंग

मैं तो रहुं संन्तन के संग,मैं तो रहुं संन्तन के संग

मेरे मन में बढ़त उमंग,मेरे मन में बढ़त उमंग

बरसाना बृज़ की रज़धानी,बरसाना बृज़ की रज़धानी

जहां विराजे राधा रानी,जहां बिराजे राधा रानी

मेरो मन....

3.मुझे दुनिया से नहीं लेना देना,मुझे दुनिया से नहीं लेना देना,

ये जगत है इक सपना,ये जगत है इक सपना

यहां कोई नहीं अपना,यहां कोई नहीं अपना

अपनी वृषभानु दुलारी,जहां विराजे राधा रानी,

मेरो मन लग्यो बरसानें में जहां विराजे राधा रानी,

मन हटो है दुनिया दारी से,मन हटो दुनिया दारी से,

जहां मिले खरा पानी,जहां मिले खारा पानी

मेरो मन....

श्री हरिदास निष्काम संर्कींतन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।