इस जग में मेरा कान्हा बिन तेरे

अमित सारस्वत जी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इस जग में मेरा, कान्हा बिन तेरे,

कोई ना सहारा है ।

छोड़कर तू चला, कमी तेरी नहीं,

दोष कुछ तो हमारा है ।।

जब आयेगा माखन चुराने,

द्वार को बन्द मैं ना करूँगी ।

मेरे मटकों को तोड़ेगा तू तो,

कोई ना शिकायत करूँगी ।।

प्राण कैसे मेरे, रहेंगे बिन तेरे,

बहे अश्रु की धारा है ।

छोड़कर...

क्यों कालिय के विष से बचाया,

क्यों कूदा था यमुना जल में ।

इन्द्र के कोप से क्यों छुड़ाया,

क्यों उठाया गोबर्धन को पल में ।।

दूर विपदा किया, क्यों न मरने दिया,

करता जब किनारा है ।

छोड़कर..

ब्रज की गलियों को सूनीं किया तू,

हम पनघट पे आहें भरेंगी ।

तेरी यादों में राधा व सखियाँ,

आग के बिन विरह से जरेंगी ।।

कान्त मैया कहे, न जा लाला मेरे,

तू तो अँखियों का तारा है ।

छोड़कर....

भजन रचना : दासानुदास श्रीकान्त दास

स्वर : अमित सारस्वत जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।