गोपी प्रेम की ध्वजा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गोपी प्रेम की ध्वजा,गोपी प्रेम की ध्वजा

1.जिंन गोपाल कवियों बस अपनें,

उर धरि श्याम भुजा

गोपी प्रेम....

2.सुकमुनि व्यास प्रसंसा कींनी,

ऊधौ संत सराही

गोपी प्रेम....

3.भूरि भाग्य गोकुल की बनिया,

अति पुनीत भव मांही

गोपी प्रेम....

4.कहा भयो जो विप्रकुल जनयो,

जो हरि सेवा नांही

गोपी प्रेम....

5.सोई कुलीन दास परमानंद,

जो हरि सम्मुख धाई

गोपी प्रेम की ध्वजा,गोपी प्रेम की ध्वजा

गोपी प्रेम....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।