विनती सुनो मेरी कृष्ण मुरारी

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

विनती सुनो मेरी कृष्ण मुरारी

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विनती सुनो मेरी, कृष्ण मुरारी,

आया हूँ मैं, शरण तिहारी ॥

ऐसा हूँ मैं, कैसा हूँ मैं,

दीन सुदामा, जैसा हूँ मैं ॥

मेरे भी तंदुल ॥ तुम स्वीकारो ।

निर्बल निर्धन, के हितकारी...

विनती सुनो मेरी...

मैं जानत हूँ, तुम हो मेरे,

तुमको सिमरूँ, मैं साँझ सवेरे ॥

यह कहते हैं ॥ आँसू मेरे ।

हर लो संकट, संकटहारी...

विनती सुनो मेरी...

सूरदास का, मन हर लीना,

मीरा बाई को, दर्शन दीना ॥

श्यामल शाह का ॥ वेस बना के ।

नरसी भक्त की, हुंडी तारी...

विनती सुनो मेरी...

यूँ न सताओ, आ भी जाओ,

मुरली की इक्क, तान सुनाओ ॥

तरस रहे हैं ॥ नैन हमारे ।

अब दिखला दो, सूरत प्यारी...

विनती सुनो मेरी...

श्री कृष्ण, गोबिंद, हरे मुरारी,

हे नाथ, नारायण, वासुदेव ॥ ॥ ॥

जय राधे राधे... श्याम मिला दे ॥ ॥ ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।