म्हारो श्याम बसे खाटु माहि

पारंपरिक
हनुमान जी भजन खाटू श्याम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

(तर्ज : ओ हो रे ताल मिले नदी के जल में)

म्हारो श्याम बसे खाटु माहि, सालासर में बजरंगी,

राणी सती राज करे जी झुंझणु के माहि,

म्हारो श्याम बसे खाटू माहि…..

हे गौरी सूत देव गजानन, ‘देवारा सिरमौर है’-2

मरुधर में धाम बणायो, ‘प्यारो रणथंबोर है’-2 (ओ भक्तो रे)

गणपति ने पूजे दुनिया घर घर माहि….

ओ सावलींयो सेठ पियारो, ‘मण्डफिया विराजे है’-2

नाथद्वारा श्रीनाथ को, ‘मंदिर यो साजे है’-2 (लो देखो रे)

भक्ता रा काज सवारे संकटये माए….

परबत पे शाकम्बरी माँ, ‘गोरिया में जिण धाम’-2

दो जाटी बालाजी को, ‘प्यारो सो एक धाम’-2 (ओ भक्तो रे)

अंजनी माँ को लाल बिराजे मेहंदीपुर माहि….

रुणिचे रामदेवजी, ‘पीरा को पीर है’-2

पूनरासर में बजरंगी, ‘वीरा को वीर है’-2 (ओ सुण जो रे)

करणी माता दर्शन देवे बीकानेर माए….

गलता जी पूण्य तीरथ है, ‘पुष्कर में ब्रम्हा धाम’-2

प्यारी प्यारी राधा सागे, ‘जयपुर में राधेश्याम’-2 (ओ श्याम रे)

निशदिन रास रचावे बालू रेत माए….

धोरा री धरती माहि, ‘सतियो का राज है’-2

राणी सती ढांढण सती, ‘राखे माँ लाज है’ (ओ दादी जी)

खेमी सती धोलीं सती, राखे माँ लाज है,

हर्ष देवी देव बिराजे राजस्थान माए….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।