जय जय पितरजी महाराज, थारी बोलां जय जयकार,

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॥ पावन पाठ ॥

(तर्ज : लेके पहला पहला प्यार)

जय जय पितरजी महाराज, थारी बोलां जय जयकार,

मन से ध्यावां मनावां, म्हारो करदो बेड़ा पार ।।

नित उठ थारो देवा, ध्यान लगावां,

लाड़ लड़ावां थानै, हाल सुनावां,

सुणज्यो म्हारी थे पुकार, टाबर बैठ्या भुजा पसार ।। १ ।।

बेगा सम्भालो आओ, देर ना लगावो,

बाट निहारां थारी, दरश दिखाओ,

म्हाने थारो ही आधार, थारै बिन कुण खेवनहार ।।२।।

देव हो दयालु थे तो, बड़ा दिलवाला,

आस लगाकर बैठ्या, बणो रखवाला,

दास ने थारी है दरकार, सूंपी थानै या पतवार ।।३।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।