मेरे चिन्तन में आके बसो लाडली

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे चिंतन में आके बसो लाड़ली,

फिर भले कुछ भी देना ना देना मुझे

तुम हो करुणा की सागर बहो लाडली,

फिर भले कुछ भी देना ना देना मुझे

मेरे....

1.आंख खोलूं तो ऊंची अटारी दिखे,

आंख मुंदू तो श्यामा जू प्यारी दिखे

तेरी करुणा के रस में बहुं लाडली,

फिर भले कुछ भी देना ना देना मुझे

मेरे चिंतन में आके बसो लाड़ली,

फिर भले कुछ भी देना ना देना मुझे

तुम हो करुणा की सागर बहो लाडली,

फिर भले कुछ भी देना ना देना मुझे

मेरे....

2.मेरे भावों को कर‌ देना सांचों प्रिये,

मेरी जिव्हा पे नाम बन नाचो प्रिये

रस की सागर हो तुम‌ अब रसों लाडली,

फिर भले कुछ भी देना ना देना मुझे

मेरे चिंतन में आके बसो लाड़ली,फिर भले

कुछ भी देना ना देना मुझे

तुम हो करुणा की सागर बहो लाडली,

फिर भले कुछ भी देना ना देना मुझे

मेरे....

3.भाव में कैसे डुबूं बता दिजिये,

प्रेम होता है क्या ये सिखा दिजिये

मैं रुदन में रहूं तुम हंसों लाडली,

फिर भले कुछ भी देना ना देना मुझे

मेरे चिंतन में आके बसो लाड़ली,

फिर भले कुछ भी देना ना देना मुझे

तुम हो करुणा की सागर बहो लाडली,

फिर भले कुछ भी देना ना देना मुझे

मेरे....

4.नाम ऐसा जपूं मुझमें आवेश‌ हो,

तेरी लीला में मेरा भी परवेश हो

हरि दासी की हालत लख़ो लाडली,

फिर भले कुछ भी देना ना देना मुझे

मेरे चिंतन में आके बसो लाड़ली,

फिर भले कुछ भी देना ना देना मुझे

तुम हो करुणा की सागर बहो लाडली,

फिर भले कुछ भी देना ना देना मुझे

मेरे....

श्री हरिदास निष्काम संर्कींतन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।