आई आई जी शिला शालिग्राम की

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - मनिहारी का भेष बनाया

आई आई जी शिला शालिग्राम की

इससे मूरत बनेगी श्री राम की

भाग्यशाली ये पत्थर है कितना बड़ा

कोटी बरसों था गंडक नदी में पड़ा

रंग लाई जी किस्मत पाषाण की

इससे मूरत बनेगी श्री राम की

ये शिला राम रूप में ढल जायेगी

ये जन्मों जन्म तक पूजी जायेगी

होगी पहचान ये अवध धाम की

इससे मूरत बनेगी श्री राम की

अब सनातन धरम की जैकार होगी

हर हिन्दू की एक ही पूकार होगी

जय राम सियाराम जय राम की

इससे मूरत बनेगी श्री राम की

राम सीता लखन और भरत शत्रुघन

इनके चरणों मे बैठेंगें वीर हनुमन

होगी गोपाल पूजा आठो याम की

इससे मूरत बनेगी श्री राम की

हेमन्त गोयल गोपाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।