मेरी बिगड़ी बना जाओ जी गणराज

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

तुम साधो तो सध जाएं

सकल सबके बिगड़े काज

मेरी बिगड़ी बना जाओ जी गणराज

मेरी बिगड़ी बना जाओ जी गणराज

तुम साधो तो सध जाएं

सकल सबके बिगड़े काज

सब देवों में प्रथम पूजे जाते हो

प्रथम देव तुम कहलाते हो

ऋषि मुनि सभी देवगण पूजे

पूजे तुमको सकल समाज

तुम साधो तो सध जाएं

सकल सबके बिगड़े काज

मेरी बिगड़ी बना जाओ जी गणराज

मेरी बिगड़ी बना जाओ जी गणराज

विघ्नहर्ता विघ्न तुम हरते हो

झोली भक्तों की सदा भरते हो

हाथ पसारे मैं भी खड़ा हूँ

लिए खाली झोली आज

तुम साधो तो सध जाएं

सकल सबके बिगड़े काज

मेरी बिगड़ी बना जाओ जी गणराज

मेरी बिगड़ी बना जाओ जी गणराज

शुभ का आरम्भ तुम करते हो

मंगल कारज सदा करते हो

मेरा भी सब शुभ कर दो

रख लो जी राजीव की लाज

तुम साधो तो सध जाएं

सकल सबके बिगड़े काज

मेरी बिगड़ी बना जाओ जी गणराज

मेरी बिगड़ी बना जाओ जी गणराज

© राजीव त्यागी

नजफगढ़ नई दिल्ली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।