एक बार तो आओ राम , दासी की कुटिया में

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

एक बार तो आओ राम , दासी की कुटिया में - २

कर लो थोड़ा आराम , दासी की कुटिया में - २

तेरे लिए रघुवर , मैं वन में रहती हूँ - २

दुःख दर्द सभी सारे, हसकर के सहती हूँ - २

कब आओगे राघव - २ , दासी की कुटिया में ,

एक बार तो आओ राम , दासी की कुटिया में - २

तेरे दरश को नैन , हर रोज तरसते हैं - २

तेरी याद में रघुवर, हर पल बरसते हैं - २

कब आओगे राघव - २ , दासी की कुटिया में ,

एक बार तो आओ राम , दासी की कुटिया में - २

सारा जीवन बिता , अब सांस बची थोड़ी - २

फिर भी मेने रघुवर , ये आस नहीं छोड़ी - २

एक बार तो आओगे - २ दासी की कुटिया में ,

एक बार तो आओ राम , दासी की कुटिया में - २

Lyrics - Jay Prakash Verma , Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।