नर में बसते नारायण, खुद भगवान

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - अफसाना लिख रही हूं

नर में बसते नारायण, खुद भगवान कहते हैं।

संसार के जीवों में प्रभु जी, वास करते हैं।

क्या लेकर हम आए, क्या लेकर जाएंगे।

जैसा करम करेंगे हम, फल वैसा पाएंगे।

परमपिता परमेश्वर ही, पालन करते हैं।

सब जीव प्राणी में है, वास नारायण का।

वेदपुराण पढ़ले देख, लिखा रामायण का।

नाम हरि का जपले, जो संग में रहते हैं ।

संसार में जो आता, वो जाता जरूर है।

कुछ नहीं है तेरा, जिसपे करता गरूर है।

इक इक स्वांस का, जो हिसाब रखते हैं।

यहां कौन है जिसको, तू कहता अपना है।

खुली आँख से दिन में, क्यों देखे सपना है।

समय की धारा में, गोपाल सब ही बहते है।

हेमन्त गोयल गोपाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।