रंग हारा वाले दे चढ़ गए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रंग हारांवाले दे चढ़ गये,

रंग होर चढ़ाके की लैणा,

रंग होर चढ़ाके की लैणा,

नैना विच सतगुरु वस गये,

कोई होर वसाके की लैणा।

तेरे नाम दा फड़ लेया पल्ला ऐ,

मैनूं लोकी केंहदे झल्ला ऐ,

नी मैं अपने शाम दी कमली,

नी मैं बनके सयाणी की लैणा,

रंग हारांवाले दे चढ़ गये,

रंग होर चढ़ाके की लैणा,

रंग होर चढ़ाके की लैणा,

नैना विच सतगुरु वस गये,

कोई होर वसाके की लैणा।

गल्ल मुकदी ऐ मुकाणी ऐ,

तेरे नाम दी लगन लगानी ऐ,

मेरा बन गया हारांवाला,

नी मैं सबनू बनाके की लैणा,

रंग हारांवाले दे चढ़ गये,

रंग होर चढ़ाके की लैणा,

रंग होर चढ़ाके की लैणा,

नैना विच सतगुरु वस गये,

कोई होर वसाके की लैणा।

असी अपना शाम मनावांगे,

दुनिया तों पिछा छुड़ावांगे,

सानू तेरी चौखट मिल गई,

दर दर ते जाके की लैणा,

रंग हारांवाले दे चढ़ गये,

रंग होर चढ़ाके की लैणा,

रंग होर चढ़ाके की लैणा,

नैना विच सतगुरु वस गये,

कोई होर वसाके की लैणा।

तुसा नाम दा जाम पिलाया ऐ,

तुसी सानू मस्त बनाया ऐ,

सानू नाम दी मस्ती चढ़ गई,

असी होर चढ़ाके की लैणा,

रंग हारांवाले दे चढ़ गये,

रंग होर चढ़ाके की लैणा,

रंग होर चढ़ाके की लैणा,

नैना विच सतगुरु वस गये,

कोई होर वसाके की लैणा।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।