हरिदास के बिहारी,तुमसा ना कोई दाता

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हरिदास के बिहारी,तुमसा न कोई दाता

आये जो दर पे तेरे,मन की मुरादे पाते

हरिदास के....

1.वृन्दावन वास तेरा,सारी दुनिया तुझको जाने

ब्रह्माण्ड के हो नायक,श्री राधे के दीवाने

नन्द बाबा है तिहारे,यशोमति है मईया तेरी

हरिदास के बिहारी,तुमसा न कोई दाता

आये जो दर पे तेरे,मन की मुरादे पाते

हरिदास के....

2.कजरारे तेरे नैंना,घायल करे ये सबको

टेढ़ी सी तेरी चितवन,पागल करे है मनको

सावन ये रूप तेरा,मन को है मेरे भाता

हरिदास के बिहारी,तुमसा न कोई दाता

आये जो दर पे तेरे,मन की मुरादे पाते

हरिदास के....

3.श्यामा श्याम को जपूं मैं,ब्रज भूमि में मैं आके

हर सांस मेरी अर्पंण,करदु तुझे मैं बांके

अपना ये सारा जीवन,अर्पित करूं विधाता

हरिदास के बिहारी,तुमसा न कोई दाता

आये जो दर पे तेरे,मन की मुरादे पाते

हरिदास के....

4.ये नरेश दास तेरा,तेरी किरपा पे है निर्भर,

जब संग पिया प्रीतम,किस बात का हमें डर

पारस ये तेरा पागल,गुनगान तेरा है गाता

हरिदास के बिहारी,तुमसा न कोई दाता

आये जो दर पे तेरे,मन की मुरादे पाते

हरिदास के....

बाबा धसका पागल पानीपत

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।