मित्तर प्यारे नूँ

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

यारडे दा साणु साथर चंगा

यारडे दा साणु साथर चंगा

भट्ठ खेडेया दा रेहना

भट्ठ खेडेया दा रेहना

मित्तर प्यारे नूँ

हाल मुरीदा दा कहना

मित्तर प्यारे नूँ

मित्तर प्यारे नूँ......

बिनूँ रोग रजाईयां दा ओढ़न

तुध बिनूँ रोग रजाईयां दा ओढ़न

नाग निवासाँ दे रेहना

नाग निवासाँ दे रेहना

मित्तरप्यारे नूँ

हाल मुरीदा दा कहना

मित्तरप्यारे नूँ

सूल सुराही ख़ंजर प्याला

बिंग कसाईयो दा सेहना

बिंग कसाईयो दा सेहना

मित्तरप्यारे नूँ

हाल मुरीदा दा कहना

मित्तर प्यारे नूँ

यारडे दा साणु साथर चंगा

यारडे दा साणु साथर चंगा

भट्ठ खेडेया दा रेहना

भट्ठ खेडेया दा रेहना

मित्तर प्यारे नूँ

हाल मुरीदा दा कहना

मित्तर प्यारे नूँ

मित्तर प्यारे नूँ......

प्रेषक:- नीरज शर्मा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।