शेरावाली तेरी चूनरिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरावाली तेरी चूनरिया लाई गोटेदार तेरे दरबार माँ ॥

लाई तेरे दरबार माँ, लाई तेरे दरबार माँ ॥

मेरी मनसा पूरी कर माँ, मेरी मनसा पूरी कर माँ,

तेरा करूँ आभार तेरे दरबार माँ,

शेरावाली तेरी चूनरिया लाई गोटेदार तेरे दरबार माँ ॥

कितने तार दिए तूमने, कितने तार रहीं हों माँ ॥

अपने भगतो कि खातिर दूषट मार रहीं हों माँ ॥

हमपर दया करों हे जननी, हमपर दया करों हे जननी,

लाई तेरा ऋंगार तेरे दरबार माँ,

शेरावाली तेरी चूनरिया लाई गोटेदार तेरे दरबार माँ ॥

ऊँचे पर्वत चड़ चड़ के पाँव हार रहें हैं माँ ॥

धूप कभी बारिश हो जा मोसम मार रहे हैं माँ ॥

बड़े जतन करके आईं हूँ, बड़े जतन करके आईं हूँ,

पाने तेरा दीदार तेरे दरबार माँ,

शेरावाली तेरी चूनरिया लाई गोटेदार तेरे दरबार माँ ॥

तेरी माया तू जाने मैं तो बस इतना जानू ॥

तू मेरे कुल की देवी मैं तो बस तूझको मानू,॥

दता की तूम बाह पकड़ लो, दता की तूम बाह पकड़ लो,

करों मेरा उद्धार तेरे दरबार माँ,

शेरावाली तेरी चूनरिया लाई गोटेदार तेरे दरबार माँ॥

Singer:- Rajni Anand

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।