ऐंना अखियां च मोहन वसा रखेगा है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ऐंना अंखियां च मोहन वसा रखैया है,

ऐ नगीना मैं मुंदरी जड़ा रखैया है

ऐंना अंखियां....

1.ज़माने दी इस नूं नज़र लग ना जावे,

ताईयों गोरे तों काला बणां रखैया है

ऐंना अंखियां च मोहन वसा रखैया है,

ऐ नगीना मैं मुंदरी जड़ा रखैया है

ऐंना अंखियां....

2.छविं सांवरे दी रवां वैंदी हरदम,

नीं मैं दिल ते कमल ते बिठा रखैया है

ऐंना अंखियां च मोहन वसा रखैया है,

ऐ नगीना मैं मुंदरी जड़ा रखैया है

ऐंना अंखियां....

3.कदी याद प्यारे दी बिसरे ना ईक पल,

नीं मैं स्वांसा च इसनूं वसा रखैया है

ऐंना अंखियां....

4.मेरे जोगिया तेरे दर दी मैं जोंगन,

क्यों जोंगन तों मुखड़ा छिपा रखैया है

ऐंना अंखियां....

5.डुबो चाहे कर पार अलबेले माझी,

मैं तां चप्पू तैंनूं फड़ा रखैया है

ऐंना अंखियां च मोहन वसा रखैया है,

ऐ नगीना मैं मुंदरी जड़ा रखैया है

ऐंना अंखियां....

6.श्याम तेरे चरणां था मैंनूं सहारा,

क्यों हरि नें हरि नूं भुला रखैया है

ऐंना अंखियां मोहन वसा रखैया है,

ऐ नगीना मैं मुंदरी जड़ा रखैया है

ऐंना अंखियां.....

बाबा धसका पागल पानीपत

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।