अब मैं वृन्दावन में बसूंगी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भाव-श्री भोली गोपी का

अब मैं वृन्दावन में बसूँगी

सन्तंन के संग बैठ बैठ मन,राधे रंग रगूँगी

अब मैं....

1.राधे नाम का रस पी पिकर,लोक की लाज

तजूँगी

अब मैं वृन्दावन में बसूँगी,सन्तंन के संग

बैठ बैठ मन,राधे रंग रगूँगी

अब मैं....

2.राधे की छविं हृदय बसाकर,हर पल नाम

रटूँगी

अब मैं वृन्दावन में बसूँगी,सन्तंन के संग

बैठ बैठ मन,राधे रंग रगूँगी

अब मैं....

3.भोली गोपी की अभिलाषा,महल टहलनी

बनूँगी

अब मैं वृन्दावन में बसूँगी,सन्तंन के संग

बैठ बैठ मन,राधे रंग रगूँगी

अब मैं....

बाबा धसका पागल पानीपत

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।