मैं गाऊँ तेरे भजन

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सुबह शाम आठों याम

मैं गाऊँ तेरे भजन

लगी है भोले चरणों की तेरे

मुझको बड़ी लगन

जीवन की ऊँच नीच में

जब कोई दर्द मुझे सताए

मुख पे नाम तेरा ही भोले

तब आके धीर बंधाए

करता रहूँ गुणगान सदा

सदा मैं करता रहूँ सुमिरन

लगी है भोले चरणों की तेरे

मुझको बड़ी लगन

सुबह शाम आठों याम

मैं गाऊँ तेरे भजन ...

तेरे प्यार में मेरे भोले

मैनें भाग्य ऐसा पाया

अपने मन को मंदिर बनाकर

तुमको उस में बिठाया

हर घड़ी तुम रहो सामने

तुम्हें देखे मेरे नयन

लगी है भोले चरणों की तेरे

मुझको बड़ी लगन

सुबह शाम आठों याम

मैं गाऊँ तेरे भजन ...

कैसी भी आए मुसीबत

तुमको याद करता हूँ

पल में दूर हो जाती हैं

जब भी फरियाद करता हूँ

हो जाए राजीव धन्य

जो पा जाए दर्शन

लगी है भोले चरणों की तेरे

मुझको बड़ी लगन

सुबह शाम आठों याम

मैं गाऊँ तेरे भजन ...

©राजीव त्यागी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।