मंगता मे तेरे द्वार तै, झोली पसार दा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मंगता मे तेरे द्वार तै, झोली पसार दा

मंगदा ना तैथो दोलता, भूखा दीदार दा

1 इक वारी पूछ खा माँ मेरे, दुखड़े तू फ़ोल के।

धो देवगा चरण तेरे, हंजुआ नू डोल के

एह दास तेरी राह ते, पलका विछाव दा मंगदा ना तैथो

2 खटया कि दस खां माँ मेरी, तेरे जहान ते।

मुदत्ता गुज़र गइया नी माँ, तेरे मुकाम ते

हथ फेरया कदै ना तू, मावा दे प्यार दा मंगदा ना तैथो----

3 हर सांस विच है ना तैरा, हर पल उडीक है

किस वार है तू आवना, कैडी तारिक है

भुहा मल के बह रहवा मे, उसे दिहाड दा। मंगता ना तैथो

4 मेरे जहां ता दास माँ, तैनू पसंद नहीं।

पर खाली दर तो जावना, मैनु पसंद नही

माँ वैष्णो-2 रहगा पुकार दा मंगदा ना तैथो दोलता-----

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।