हे माँ स्वेत वस्त्र धारणी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे माँ स्वेत वस्त्र धारणी वीणा मधुर बजाबी

हम दुःख मे कानी भवानी सुनियौ हमर कहानी

अहाॅ जग में ज्ञान दैय छी अज्ञानता हरैय छी

अही के जगत ई पुरा नित वंदना करैय छी

हम हाथ जोङने माता नित प्रर्थना करैय छी

हम दुःख...

केहन कठोर भेलौ नैय ज्ञान कनियो देलौ

लोभी भरल ई दुनिया संसार मे माँ भेजलौ

कष्ट से उवारू मैया हमहु बेकल परल छी

हम दुःख....

गुण वान छै ई दुनिया अज्ञान माँ बनेलौ

मुकेश पर अहाॅ मैया नै ज्ञान कनियो देलौ

खोलू नयन हे मैया हम याचना करैय छी

हम दुःख....

MUKESH PANDIT

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।