रस पीले वृंदावन का, आनंद ही पाएगा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रस पीले वृंदावन का, आनंद ही पाएगा

पीकर देख जरा, जीना आ जाएगा

ये रस अनमोल है, बिन मोल ही मिलता है

बिखरा है जगह~जगह,कहीं~कहीं पर मिलता है

मत भटके इधर-उधर, तेरे पास ये आएगा

सुबह भी मिलता है,ये शाम भी मिलता है

रसिक जनों को यह,आठो याम मिलता है,

एक स्वरूप नही है, नव रस् में पाएगा

स्वाद निराला है, पीता मतवाला है

गोपाल खुद हमने, देखा भाला है

मिलता है श्यामकृपा से ,भव से तर जाएगा

हेमन्त गोयल गोपाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।