दिन होता है मैया रात ढलती

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दिन होता है मैया रात ढलती

तेरी ही कृपा से मेरी दुनिया चलती II

जगत जननी तू तूने दुनिया बसाई है

माँ तू ही तो सबकी एक सहाई है

है तेरा सहारा तो सारी विपदा टलती

तेरी ही कृपा से मेरी दुनिया चलती

दिन होता है मैया रात ढलती...

जिस जगह माँ तेरी आशनाई है

तेरे नूर की वहाँ फैली रोशनाई है

जगमग मैया जी तेरी जोत जलती

तेरी ही कृपा से मेरी दुनिया चलती

दिन होता है मैया रात ढलती....

ना चाहूं मैं मैया धन और दौलत

बहुत है जो पाया माँ तेरी बदौलत

रखती नहीं खाली झोली सदा भरती

तेरी ही कृपा से मेरी दुनिया चलती

दिन होता है मैया रात ढलती..

तेरी ममता की होती है छाँव जहाँ

मैया गमों की कभी होती नहीं धूप वहाँ

देर से जाना रही राजीव की गलती

तेरी ही कृपा से मेरी दुनिया चलती

दिन होता है मैया रात ढलती...

©राजीव त्यागी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।