बईयां न मरोड़ वे शामा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ब‌ईयां ना मरोड़ वे श्यामा मैं गुजरी हां गोकुल दी-----

मैं गुजरी हां गोकुल दी-----

वृन्दावन दे वे शामा मैं गुजरी --

सुबह सवेरे मैं दही बेचन जावां--2

तू मटकियां दिंदा फोड़ शामा ---

मैं गुजरी हां गोकुल दी--2

ब‌ईयां ना मरोड़ वे शामा

मैं गुजरी हां गोकुल दी

वृन्दावन दे वे शामा

मैं गुजरी हां........

सुबह सवेरे मैं ग‌ईयां चौवन जानी आ-2

बछ्छियां देंदा छोड़ श्यामा

मैं गुजरी हां गोकुल दी

ब‌ईया ना मरोड़ वे शामा, मैं गुजरी हा गोकुल दी

वृन्दावन दे वे शामा मैं गुजरी हो गोकुल दी

वृन्दावन दी कुंज गली दे विच-2

गोपियां देंदा छेड़ शामा

मैं गुजरी हां गौकुल दी

मैं गुजरी हां गोकुल दी-2

ब‌ईयां ना मरोड़ वे शामा मैं गुजरी हां गोकुल दी

वृन्दावन दे वे श्यामा मै गुजरी...

सखियां सारियां यमुना तट जांदिया-2

तू चीरां दा है चोर शामा

मैं गुजरी हां गोकुल दी_2

ब‌ईयां ना मरोड़ वे शामा....

वृन्दावन दे वे शामा ---

मथुरा दे विच ग‌ऊआ चरावे_2

तू मक्खना दा चोर शामा

मैं गुजरी हां गोकुल दी--2

ब‌ईयां ना मरोड़ दे शामा मैं गुजरी.....

वृन्दावन दे वे श्यामा मै गुजरी...

मै गुजरी हां गोकुल दी..2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।