दुनिया में ईश्वर एक ही है, मुझे क्या लेना है हजारों से

स्वामी सदानंद
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

दुनिया में ईश्वर एक ही है, मुझे क्या लेना है हजारों से।

अनहद की धुन बजे घट में, उसे क्या लेना है नगारो से।।

घट भीतर भगवान बसे, संसार के विषयों की चाह नहीं।

है सम दृष्टि सबके भीतर, उसे सुख दुःख की परवाह नहीं।।

आना जाना जग रीती है, तुम सीखो बसंत बहारों से ।

यहां संग नही चलता कोई, तुम मिलते लोग हजारों से।।

कोई रहता एक अकेले में, नहीं पङता जग के झमेले में।

कोई मोह माया में बंधकर के, रहता है जग के मेले में।।

मत करना विश्वास कभी, यहां लोग सभी है मतलब के।

स्वार्थ हित रिस्ते जोङ रहे सब,प्रीति करले तु रब से।।

कहे सदानंद सांची सुणलो, यह हरि सुमिरन की बेला है।

संग कर्म चले अपने अपने, ओर कहाँ गुरू कहां चैला है।।

लेखक : स्वामी सदानंद

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।