कोई ए माँ तेरे दरवार से खाली न गया,

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कोई ए माँ तेरे दरवार से खाली न गया,

न गया माँ तेरे दरवार से खाली न गया

जिसने जो कुछ भी है मांगा तो मुरादे पाई,

जिसने माँ कह के पुकारा तू सामने आई।

हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया।

न गया माँ तेरे दरवार से खाली न गया.......

ये वो दरबार है जिस दर से दया मिलती है।

ये वो दरबार है जिस दर से सिफा मिलती है।

कैसे कह दूं कि मैं दरबार से पाई ना दया

न गया माँ तेरे दरवार से खाली न गया ........

मैं भी आया हूं तेरे दर पे सवाली होकर,

एक उजड़े हुए गुलशन कावो माली होकर,

एक भी फूल तेरे दर पे चढ़ाया न गया,

न गया माँ तेरे दरवार से खाली न गया ........

अब न छोडूंगा कभी देखले तेरा आंचल,

ले ले गोदी में अपने लाल को फैला आंचल,

तेरे आंचल से फिसल कर कोई खाली न गया।

न गया माँ तेरे दरवार से खाली न गया ........

कोई ए माँ तेरे दरवार से खाली न गया,

न गया माँ तेरे दरवार से खाली न गया।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।