अलूसिंह जी महाराज को नमन बार बार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज : तुमको मेरा नमस्कार है सांवरा

आलू सिंह जी महाराज को नमन बार बार

उनकी सेवा और भग्ति को नमन बार बार

1.. श्याम बहादुरजी को वो, मानते थे गुरु

उन गुरुवों को दिल से.. नमन बार बार

2.. चुनकर लाते थे वो, श्याम बगीची से फुल

उस बगीची और फुलों को.. नमन बार बार

3.. घर घर जाते थे वो, ज्योत जगाते थे वो

उनके भावभरे भजनों को.. नमन बार बार

4.. भग्तों को तीन थापी, लगाते थे वो

उस मोरछड़ी के झाड़े को.. नमन बार बार

5.. भग्तों के काम करवाते, थे भाव से

उनकी किरपा और अखाड़ों को.. नमन बार बार

6.. उनके हाथों से ही, सजता था सांवरा

उस चंदन के लेप को.. नमन बार बार

7.. दो अक्टूबर के दिन, वो हो गए श्यामलीन

उनकी पुण्यतिथि को.. नमन बार बार

8.. कहते थे वो हर बार, ये है साँचा दरबार

भग्तों के संग अम्बरीष का.. नमन बार बार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।