जय मां जय मां असी दिन रात कई जानेआ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय मां जय मां असी दिन रात कई जानेआ

ओदे नाम दे सहारे मोजा लई जानेआ

1,

बड़ा कुज दित्ता मां ने बड़े खुशहाल हां

चिंता नईयों कोई मां दे रंगा च निहाल हां

फुल श्रद्धा दे असी मां नू दई जानेआ

जय मां जय मां असी दिन रात कई जानेआ

2,

हर पल हर घड़ी मां दा शुकर मनांदे हां

कोई नईयों संग असी मां दा दित्ता खांदे हां

आके सुबह शाम दर मां दे बई जानेआ

जय मां जय मां असी दिन रात कई जानेआ

3,

साडे उत्ते मां ने सागर कित्ती किरपा खास ए

होर किसे कोलों असी रखी वो न आस ए

मां दा दर छड्ड होर दर नई जानेआ

जय मां जय मां असी दिन रात कई जानेआ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।