गुरु देव अरज मेरी

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज : बस इतनी तमन्ना है...

गुरूदेव अरज मेरी–२

चरणों में जगह देना सिर हाथ सदा रखना ।। टेर ।।

तुम हारे के साथी,तुम दीपक मैं बाती

सागर है तँ भक्ति का-२ दो घूँट पिला देना ।। १ ।।

जब जब विपदा आती, तेरी याद मुझे आती

अब तक तो निभाई है-२ आगे भी निभा देना ।। २ ।।

तेरे साथ गुजारे जो,वो दिन बड़े प्यारे थे।

तेरी याद रहे दिल में-२ बस ऐसा वर देना ।। ३ ।

गर लाज गई मेरी, पत जायेगी तेरी

सुरेश शरण तेरी-२ हिवड़े से लगा लेना ।। ४ ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।