चुनरी भजन चटक रंग चुनरी

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

चटक रंग चुनरी मांँ न उड़ाओ

मंगल गीत मांँ न आज सुनाओ

माथे बोरलो मांग में टिको

नाक में बेसर कान में झुमको

कमल तन कोमल कनक बनाओ

चटक रंग चुनरी मांँ न उड़ाओ

मंगल गीत मांँ न आज सुनाओ

लाल है चुनड़ चुड़लो है लाल

रोली लाल है मोली भी लाल

मेहंदी से मांँ को हाथ भी लाल

छवि मांँ की न्यारी लागे है प्यारी

चटक रंग चुनरी मांँ ने उड़ाओ

मंगल गीत मांँ ने आज सुनाओ

कुंडल पैरया काना माही

पग में पायल घुंघर वाली

गले बिच सोहे हीरा को हार

सूरत मांँ की भोली लाग है प्यारी

चटक रंग चुनरी मांँ न उड़ाओ

मंगल

झुंझन वाली आप पधारो

घर में मैया आय बिराजो

पूनम की मांँ अर्जी स्वीकारों

मैं किन विधि गांवा महिमा है भारी

चटक रंग चुनरी मांँ न उड़ाओ

मंगल गीत मांँ न आज सुनाओ

माथे बोरलो मांग में टिको

नाक में बेसर कान में झुमको

कमल तन कोमल कनक बनाओ

चटक रंग चुनरी मांँ न उड़ाओ

मंगल गीत मांँ न आज सुनाओ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।