मेरे बांकें बिहारी लाल मुझे तेरी याद सताती है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्री हरिदास

तर्ज़ :- आ लोट के आजा मेरे मीत

मेरे बांकें बिहारी लाल, मुझे तेरी याद सताती है

मेरे कुंज बिहारी लाल, सुरत तेरी मन को‌ लुभाती है

मेरे बांके....

देखा तुझे तो मन में बसी है, सुरत तुम्हारी नुरानीं

तेरे बिना अब मुझको तो लागे,सारी ये दुनिया विरानीं

तेरे पिछे पड़ा हूं सब छोड़, मुझे तेरी याद सताती है

मेरे बांके....

तेरे बिना ये जीवन है सुना,डुंडूं तुझे तो दिखै कहीं ना

बृज़ मण्डल की ली मैंनें ठोर,मुझे‌ तेरी याद सताती हैं

मेरे बांकें....

रूप रसका हुं पागल, भरी मन की गागर

धसका नाम‌ में डुबा रहेगा, अब देर ना कर सरकार,

जीवन के दिन दो चार, मुझे तेरी याद सताती है

मेरे बांकें बिहारी‌ लाल,मुझे तेरी याद सताती है

मेरे कुंज बिहारी लाल,सुरत तेरी मन को लुभाती है

मेरे बांकें....

बाबा धसका पागल पानीपत

फोंन:-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।