मैया दे द्वारे असीं जाना सानू चिट्ही आई ऐ

पारंपरिक
माता दुर्गा गुरु वाणी दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया दे द्वारे असीं जाना सानू चिट्ही आई ऐ-2

रज रज दर्शन पाना सानू चिट्ठी आई ऐ-2

मैया दे द्वारे असीं जाना.

मंजिल वी दूर है जाना वी जरूर है,

चेहरे उते लालियां अखां च सरूर है

अंग संग माई है सबदी सहाई है,

जीने वी बुलाया मैया दौड़ी दौड़ी आई है.

पर्वता दे उत्ते है ठिकाना सानू चिट्ी आई ऐ-2

मैया दे द्वारे असीं जाना.

मन्दिर निराला है सोहणी गुफा वाला है,

हर वेले खुल्ला रहन्दा न बुआ ताला

गंगा जी दा पानी है जोत नुरानी है,

ऊंचेया सिहांसना ते बैठी महारानी है.

दिल वाला हाल सुनाना सानू चि्ही आई ऐ-2

मैया दे द्वारे असीं जाना

सोहणा दरबार हैं लीला अपार है,

मैया रूप विच बैठी आधक्वार है

शेर दी सवारी है अष्ट भुजाधारी है

शस्त्रा दे नाल सज्जी अर्धक्वांरी है

असां जा के शीश झुकाना सानू चिट्ठी आई ऐ-2

मैया दे द्वारे असीं जाना.

मैया दे द्वारे असीं जाना सानू चिट्टी आई ऐ-2

रज रज दशंन पाना सानू चिट्डी आई ऐ-2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।