तेरे दर का पुजारी बनूं बाबा मुझको ये वर चाहिए

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज़ - जिंदगी प्यार का गीत है

तेरे दर का पुजारी बनूं, बाबा मुझको ये वर चाहिए

तेरी सेवा मैं करता रहूं, बाबा मुझको ये वर चाहिए

तेरे भजनों को गाता रहूं, मेरे मन में तेरा ध्यान हो

तुझको हरपल रिझाता रहूं, मेरे लब पे तेरा नाम हो

सिर ये अपना झुकाता रहूं, बाबा मुझको ये वर चाहिए

तेरी चौखट पे ही बैठकर, बीत जाए ये जीवन मेरा

मेरी नादानी को भूलकर, मीत बन जाए तू ही मेरा

दर्दे दिल की सुनाता रहूं, बाबा मुझको ये वर चाहिए

तेरी किरपा की छाया मिले, दूर जीवन का अंधियारा हो

ज्ञान की रौशनी भी जगे, मेरे हिरदय में उजियारा हो

तेरी करुणा मैं पाता रहूं, बाबा मुझको ये वर चाहिए

तुझसे जन्मों का नाता रहे, मेरे मन में यही आस हो

‘कमला’ को तू निभाता रहे, मुझको तुझपे ही विश्वास हो

तेरी राहों पे चलता रहूं,बाबा मुझको ये वर चाहिए

राहुल शर्मा कमला - बराकर,पश्चिम बर्धमान

8637836102 / writerrsk@gmai। com

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।