ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम

पारंपरिक
शनि देव भजन शनि देव भजन shani
॥ पावन पाठ ॥

ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।

छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।

ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।

छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।

ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।

छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।