पैंदा पैंदा जी गिद्दा मईया जी दे बेड़े

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पैंदा पैंदा जी गिद्दा मईया जी दे बेड़े-2

मईया जी दे बेड़े शेरांवाली जी दे बेड़े

पैंदा पैंदा जी .................

मईया मेरी चिन्तपूर्णी जदो जदो वी आवे-2

पगतो जदो जदो वी आवे-2

अपने पगता दी ओ मईया चिन्ता दूर हटावे-2

पगतो चिन्ता दूर हटावे-2

दुःख ते कलेश कदे आन नइयो नेड़

पैंदा पैंदा जी..................

मईया मेरी ज्वाला रानी जदो जदो वी आवे-2

पगतो जदो जदो वी आवे-2

मन दे कर दे दूर हनेरे आके ज्योत जगावे-2

पगतो आके ज्योत जगावे-2

मंग लो ऐ पगतो, मईया पावे घर फेरे

पैंदा पैदा जी..................

मईया मेरी वैष्णो रानी जदो जदो वी जाईए-2

पगतो जदो जदो वी जाइए-2

चढ़के चढ़ाईयां उचिया पगतो, कदे नइ घबराईए_2

पगतो कदे नही घबराइए-2

उचिया चढ़ाईया, लाए गुफा विच डेरे

पैंदा पैंदा जी......................

मईया मेरी मनसा देवी, जदो जदो वी आवे-2

पगतो जदो जदो वी आवे-2

सब दी मनसा पूरी करदी, कोई न खाली जावे-2

पगतो कोई न खाली जावे-2

आशा सबदी पूरी करदी, पाग जाग जन तेरे

पैदा पैंदा जी..............

मईया मेरी कालका रानी, जदो जदो वी आवे-2

पगतो जदो जदो वी आवे-2

चंडमुंड नु मारन वाली, सब दे कष्ट मिटावे-2

पगतो सब दे कष्ट मिटावे-2

गेड़ चौरासी वाले, कट जान तेरे

ओ पैंदा पैंदा ..................

मईया मेरी नैना देवी जदो जदो वी आवे-2

पगतो जदो जदो वी आवे-2

नैना दा ओ नूर वक्शदी, करदी दूर हनेरे-2

पगतो करदी दूर हनेरे-2

शिव दुर्गा मण्डली मईया, पावे दर्शन तेरे-2

पैदा पैंदा जी..…................

मईया जी दे बेड़े, शेरावाली जी दे बेड़े

पैदा पैदा जी.........

पैंदा पैंदा जी.................

पैंदा पैदा जी गिद्दा मईया जी दे बेड़े

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।