॥ पावन पाठ ॥
सीयाराम कण कण है समाया ।
जिधर देखा नज़र वही आया ॥
सागर जल में वही, गगन थल में वही ।
सेनादल में वही, भक्ति बल में वही ॥
रोम रोम राम नाम रस छाया,
सीयाराम कण कण है समाया ।
जिधर देखा नज़र वही आया ॥
सागर जल में वही, गगन थल में वही ।
सेनादल में वही, भक्ति बल में वही ॥
रोम रोम राम नाम रस छाया,