मोरी भी रंग दो चुनरिया,

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोरी भी रंग दो चुनरिया,

कान्हां मैं तोरी पूजा करूगीं

मोरी भी....

1.मगंती हूं खाली ना मोड़ों,

मुझ पापन की आस ना तोड़ो

दासी की चीजों खबरिया,

कान्हां मैं तोरी पूजा करूगीं

मोरी भी....

2.ऐसा जोगनिया को मधवा पिला।

दो,

मधवा पिला के मोरी सुध बुध

गवां दो

छलके ना मन घूघरिया,कान्हां मैं

तोरी पूजा करूगीं

मोरी भी....

3.धुंम मची है बृज़ में तिहारी,

बलि बलि जाऊं थारी कृष्ण

मुरारी

फिर से बजाओ बांसुरिया,

कान्हां मैं तोरी पूजा करूगीं

मोरी भी रंग दो चुनरिया,

कान्हां मैं तोरी पूजा करूगीं

राधे राधे,राधे राधे, राधे राधे

राधे राधे, राधे राधे,राधे राधे

बाबा धसका पागल पानीपत

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।