फागुन का महीना चलो मालपुरा दरबार लिरिक्स

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - सावन का महीना

फागुन का महीना , चलो मालपुरा दरबार ।

दादा गुरु संग होली , हम खेलेंगे इस बार ।।

रंग रंगीला फागुन ये आया ।

दादा गुरु ने मालपुरा बुलाया ।।

दूर दूर से आते , है लाखो ही नर नार

दादा गुरु संग होली , हम खेलेंगे इस बार ।।

फागुन का महीना ....

दादा गुरु की दुनिया दीवानी है ।

कुशल गुरु से मेरी प्रीत पुरानी है ।।

सोनू मालपुरा में आता रहूँ हरबार

दादा गुरु संग होली , हम खेलेंगे इस बार ।।

फागुन का महीना ....

अमाँवास को स्वर्ग सिधारे ।

पूनम को दादा गुरुवर दर्श दिखाये ।। 2X

उदय राज की अर्जी करली तुमने स्वीकार

दादा गुरु संग होली , हम खेलेंगे इस बार ।।

फागुन का महीना....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।