दुर्गे माँ दुर्गे माँ जाना नही

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

(तर्ज:- परदेशी परदेशी जाना नही)

दुर्गे माँ दुर्गे माँ जाना नही .... हो जाना नही

हमे छोड़कर...मुझे छोड़कर

दुर्गे माँ हम तुझको

रो रो पुकारे

दुर्गे माँ दुर्गे माँ जाना नही .... हो जाना नही

हमे छोड़कर...मुझे छोड़कर -2

हाथ हमारा पकड़ा है तो छोड़ो ना

रिश्ता हमसे जोड़ा तो तोड़ो ना -2

दुर्गे माँ तू हमसे

रिश्ता निभा रे

दुर्गे माँ दुर्गे माँ जाना नही .... हो जाना

हमे छोड़कर...मुझे छोड़कर -2

इस दुनिया में मईया तेरा सहारा है

माँ दुर्गे बस तू ही एक हमारा है -2

दुर्गे माँं हम कैसे

जीवन गुजारे

दुर्गे माँ दुर्गे माँ जाना नही .... हो जाना

हमे छोड़कर...मुझे छोड़कर -2

जिस दिन मईया तू हमे छोड़कर जायेगा

बेटा तेरा जीते जी मर जायेगा -2

दुर्गे मईया हम जीते है

तेरे सहारे

दुर्गे माँ दुर्गे माँ जाना नही .... हो जाना

हमे छोड़कर...मुझे छोड़कर -2

लेखक और तर्ज: -(sudama yadav)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।