अम्बे भवानी तेरी आरती गाऊं

पारंपरिक
महादेव आरती दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

अम्बे भवानी तेरी आरती गाऊं

शिव पटरानी तेरी आरती गाऊं

शीश मुकुट मैय्या, अद्भुत सोहे-२

लाल चुनर सबके, मन मोहे-२

देख छवि मां बलि बलि जाऊं...

अम्बे भवानी तेरी...

चरणों की तेरी, छवि निराली-२

चरणों पे जाए मैय्या, ये दुनिया वारी-२

उन चरणों पे मैं शीश नवाऊं...

अम्बे भवानी तेरी...

ध्यानूं भगत ने, तुमको पुकारा-२

कटा हुआ शीश तेरे, चरणों पे वारा-२

घोड़े का शीश तूने, पल में लगाया...

अम्बे भवानी तेरी आरती गाऊं...

मैय्या अनाथ की, नाथ आप हो-२

जीवन धन मेरी, प्राण आप हो-२

चरण कमल पे मैं, बलि-बलि जाऊं...

अम्बे भवानी तेरी आरती गाऊं...

पीर हरो हम, सबकी ओ माता-२

सारा जगत तेरा, ध्यान लगाता-२

आज तुम्हें मैं दिल से बुलाऊं...

अम्बे भवानी तेरी आरती गाऊं..

कहत गिरीश हे! जग-कल्याणी-२

कृपा करो हे! आदि-भवानी-२

भक्तों की पीर मैं, तुमको सुनाऊं...

अम्बे भवानी तेरी आरती गाऊं...

लेखक और गायक: पं गिरीश पाण्डेय

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।