मैया तेरी बेटी का ब्याह आ गया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ज़िन्दगी मे नया बदलाव आ गया

मैया तेरी बेटी का ब्याह आ गया

ज़िन्दगी का नया अध्याय आ गया

जिन्दगी में नये नये रिश्ते जुड़ेंगे

रिश्तों के साथ साथ रस्ते मुड़ेंगे

मन में भी थोड़ा थोड़ा चाव आ गया

मैया तेरी बेटी का ब्याह आ गया

मां बाप बहन भाई चाव करेंगे

चाव चाव में थोड़ा घाव करेंगे

इसीलिए आखों में रिसाव आ गया

मैया तेरी बेटी का ब्याह आ गया

मुझे नये घर में तेरा साथ चाहिए

सबके ही सर पे तेरा हाथ चाहिए

बातों बातों में ये मेरा भाव आ गया

मैया तेरी बेटी का ब्याह आ गया

शिव की शिवानी हे माता गौरजां

रहूं मैं सुहागिन ये तेरी हो रज़ा

तेरी भक्ति का आज ये प्रभाव आ गया

मैया तेरी बेटी का ब्याह आ गया

इक पल वी ना परे तेरे कोलों होवां मै

राती परभाती तेरे चरणा नू धोवां मैं

तेरा करां शिंगार करां मै तेरी जै जयकार लैके फुल्लां दे सेहरे

मैया जी असी नौकर तेरे

हर वेले हर थां ते गुण तेरे गांवां मै

सेवा दी मजूरी बस तैथों एहीयो चाहवां मै

जोश ते किरपा करो ते वस्सो हिरदे मेरे

मैया जी असी नौकर तेरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।