हे नाथ अब तो ऐसी दया हो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हे नाथ अब तो ऐसी दया हो

जीवन निरर्थक जाने न पाए

ये मन ना जाने क्या क्या कराये

कुछ बन ना पाए मेरे बनाये

कुछ बन ना पाए मेरे बनाये

हे नाथ अब तो ऐसी दया हो

जीवन निरर्थक जाने न पाए

ऐसा जगा दो फिर सो ना जाऊँ

अपने को निष्काम प्रेमी बनाऊँ

तुमको ही चाहु तुमको ही पाऊँ

संसार का भय कुछ रह ना पाए

ये मन ना जाने क्या क्या कराये

कुछ बन ना पाए मेरे बनाये

हे नाथ अब तो ऐसी दया हो

जीवन निरर्थक जाने न पाए

वो योग्यता दो सत्कर्म करलू

ह्रदय में अपने सद्भाव भरलू

नर तन है साधन भवसिन्धु तरलू

ऐसा समय फिर आये न आये

ये मन ना जाने क्या क्या कराये

कुछ बन ना पाए मेरे बनाये

हे नाथ अब तो ऐसी दया हो

जीवन निरर्थक जाने न पाए

हे नाथ अब तो ऐसी दया हो

जीवन निरर्थक जाने न पाए

हे नाथ अब तो ऐसी दया हो

जीवन निरर्थक जाने न पाए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।