जय शैल सुते शम्भु नुते दीपाचन स्वीकारो (करवा चौथ पर विशेष)

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय शैल सुते शम्भु नुते दीपाचन स्वीकारो

आरती वंदन स्वीकारो

कृपा करदो, हमें वह वर दो, जो प्रियवर हमारो

जय शैल सुते...

हे महामाया, तुम्हारी माया, आगम निगम ना जाने

हम गोपीजन गुण से निर्धन, क्या तुमको पहचाने

हम प्रेम विवश, भक्तो की दशा माँ तुम ही तनिक विचारो

जय शैल सुते...

ब्रह्मा विष्णु महेश निरंतर तुम्हरो ध्यान लगावें

शक्ति उपासक शक्ति के याचक शक्ति तुन्ही से पावें

ममता पूरित नैना वाली, अब हमरी और निहारो

जय शैल सुते...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।